Thursday, 12 January 2012

लव-कुश की जन्म भूमि उपेक्षा का शिकार

लव-कुश की जन्म भूमि उपेक्षा का शिकार
धार्मिक स्थल तुरतुरिया



Webdunia

ND

रामायण कालीन महर्षि वाल्मिकी की महान धरा एवं माता सीता के पुत्र लव-कुश का जन्मस्थल कहे जाने वाला धार्मिक स्थल तुरतुरिया आज बदहाली का दंश झेलने के लिए विवश है। इस तीर्थस्थल को विकसित करने के लिए शासन द्वारा किसी तरह के प्रयास नहीं किए जा रहे। गौरतलब है कि यहाँ हर साल छेरछेरा पुन्नी के पावन पर्व पर तीन दिवसीय भव्य मेला का आयोजन किया जाता है जिसमें हजारों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं।

सनातन धर्म से जुड़ी धरती : सनातन धर्म की आस्था इस धरती से जुड़ी है रामायण कालीन महर्षि वाल्मिकी आश्रम एवं वैदेही विहार के रूप में माता सीता तथा लव-कुश की यादों को सहेजे यह धरती शांत मन को प्रफुल्लित करने वाली है। यहां शक्तिस्वरूपा मां काली की प्रतिमा सघन वृक्षों एवं पहाड़ों में विराजित है, जहां क्षेत्रवासी अपनी मुरादें पूरी करने प्रति वर्ष छेरछेरा पुन्नी मेले में आते हैं और इन्हें तुरतुरिया माता के नाम से पुकारते हैं।

जनपद पंचायत के अधीन देख-रेख : तुरतुरिया मेला की व्यवस्था स्थानीय जनपद पंचायत के अधीन है। बताया जाता है कि मेला के तीन दिन लाखों श्रद्घालुओं का रेलमपेल लगा रहता है लेकिन अभी वर्तमान समय में इस पावन भूमि के प्रति लोगों की आस्था दिन-प्रतिदिन बढ़ने के साथ-साथ बारहों महीने लोगों का आवागमन लगा रहता है।

ND
सुविधाओं का अभाव : स्थानीय लोगो का कहना है कि मेला परिसर में जनपद पंचायत द्वारा व्यापारियों को सुविधा देने के एवज में राशि ली जाती है लेकिन मेले में न तो पेयजल की व्यवस्था होती है और न ही सफाई की। यहां आए श्रद्धालु डिस्पोजल, पत्तल, प्लास्टिक की वस्तुओं को जहां-तहां फेंक कर चले जाते हैं जिसके चलते यहां गंदगी का आलम सा बना रहता है। जनपद इसकी सफाई की सुध नहीं लेता।

कसडोल के जनपद पंचायत सीईओ प्रताप सिंह ठाकुर के अनुसार तुरतुरिया में तीन दिन का मेला लगता है जिसमें मेला समितियों के द्वारा व्यवस्था की जाती है लेकिन अब वर्षभर श्रद्घालु आते रहते हैं। इसके चलते जल्द ही श्रद्घालुओं को समुचित व्यवस्था प्रदान करने के लिए आगामी मेला समिति की बैठक में प्रस्ताव रखा जाएगा।

पुराना रास्ता ही था सुरक्षित : ग्राम ठाकुर दिया से तुरतुरिया पहुंचने के 4 किमी. मार्ग पर जान-लेवा घाटियों से होकर गुजरना पड़ता है। लोगों का कहना है कि तुरतुरिया जाने के लिए पुराना मार्ग ही सही था, लेकिन स्टाप डेम बनाने के कारण पुराने रास्ते को बंद कर दिया गया है। जिसके चलते श्रद्घालु इस जानलेवा ढलान वाली घाटी से अंजान रहते हैं जिसके कारण हमेशा दुर्घटना होने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों की मांग है कि शासन यहां सुविधाएं बढ़ाए और उक्त घाटी की ढलान को कम करें ताकि गंभीर दुर्घटनाओं को टाला जा सके।

सोजन्य  से  वेबदुनिया   



छत्तीसगढ़ में रामायणकालीन संस्कृति की झलक आज भी देखने मिलती हैं। जिससे यह साबित तो होता है कि भगवान श्रीराम के अलावा माता सीता और लव -कुश का संबंध भी इसी प्रदेश से था। घने जंगलों के बीच स्थित तुरतुरिया में महर्षि वाल्मीकि का आश्रम इसी बात की याद दिलाता है कि रामायण काल में छत्तीसगढ़ का कितना महत्व रहा होगा। प्राचीन जनश्रुतियों के अनुसार श्रेतायुग में यहां महर्षि वाल्मीकी का आश्रम था और यहीं पर उन्होंने सीताजी को रामचंद्र जी द्वारा त्याग देने पर आश्रय दिया था।

Add caption
रायपुर -बलौदाबाजार मार्ग पर ठाकुर दिया नाम स्थान से सात किलोमीटर की दूरी पर घने जंगल और पहाड़ों पर स्थित है तुरतुरिया। यह रायपुर से 113 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यहां जाने का रास्ता शायद पहले आसान नहीं रहा होगा, क्योंकि सुरम्य और घनी पहाड़ियों के बीच स्थित इस स्थान में जगह-जगह पहाड़ी कछार, छोटे-छोटे नाले और टीलें हैं । इन्हीं पहाड़ियों के बीच बहती है बालमदेही नदी जिसका पाट तुरतुरिया के पास काफी चौड़ा हो गया है। पहाड़ी नदी होने के कारण वर्षा तु में इसका तेज प्रवाह तुरतुरिया तक पहुंचने के रास्तों को और कठिन बना देता है। यह नदी आगे चलकर पैरागुड़ा के पास महानदी में मिल जाती है। 
छत्तीसगढ़ रा?य बनने के बाद और भाजपा के शासन काल में जब से श्री बृजमोहन अग्रवाल ने संस्कृति और पर्यटन मंत्री का पद संभाला है, इस रा?य के ऐतिहासिक और पौराणिक साक्ष्यों से संबंधिक क्षेत्रों के जैसे दिन ही फिर गए हैं। इन क्षेत्रों का लगातार विकास कर इन्हें पर्यटन क्षेत्रों के रूप में उभारा जा रहा है। तुरतुरिया को ही ले लीजिए। जहां पहुंचना पहले आसान नहीं था, लेकिन अब इसके रास्तों को आसान बनाया जा रहा है। छोटे-छोटे मोड़दार नालों पर छोटी-छोटी पुलियां बननी शुरू हो गई हैं। मोटल का निर्माण प्रगति पर है यानी अब वहां पर्यटकों का पहुंचना और ठहरना आसान तथा आरामदायक हो गया है। तुरतुरिया तीन मुख्य रास्तों से जाया जा सकता है, एक सीधे रायपुर से बारनवापारा जंगल होते हुए, सिरपुर से या फिर बलौदाबाजार से।
तुरतुरिया की वन विभाग की चौकी पार करने के बाद दो सौ कदम के फासले पर ही स्थित है महर्षि वाल्मीकि का आश्रम । सामने ही एक पहाड़ी पर वैदेही कुटीर नजर आती है। वहां तक पहुंचने के लिए पहाड़ियों को काटकर सीढ़ियां बना दी गई हैं। सीढ़ियों के किनारे-किनारे जंगली मोगरे के छोटे-छोटे पौधे बिखरे पड़े हैं। गर्मियों और बारिश में जब ये फूल खिलते हैं, तो वातावरण और खुशनुमा हो जाता है। ऊपर पहुंचने पर एक पक्की कुटीर नजर आता है। यदि आपकी किस्मत अच्छी है, तो आपको ऊपर पहुंचने पर हिरणों का झुंड भी विचरण करता नजर आ सकता है। हालांकि पर्यटकों की आहट से चौकन्ना होकर ये हिरण कुंलाचे भरते हुए पल भर में पेड़ों के झुुरमुट में गायब भी हो जाते हैं। रात में और भी जानवर यहां पर देखे जा सकते हैं। इसी पहाड़ी से लगी एक अन्य पहाड़ी है, जहां पर महर्षि वाल्मीकी का आश्रम स्थित है।



प्राचीन जनश्रुतियों के अनुसार श्रेतायुग में यहां महर्षि बाल्मीकी का आश्रम था और यहीं पर उन्होंने सीताजी को रामचंद्र जी द्वारा त्याग देने पर आश्रय दिया था। यहीं पर सीताजी के दोनोें पुत्र लव और कुश ने जन्म लिया था। वैदेही कुटीर के नीचे ठीक बाएं एक संकरा रास्ता पैदल जाता है। सामने ही कलात्मक खंभे दिखाई देते हैं, जो विखंडित हो चुके हैं। पहाड़ी पर ही कुछ पक्के मंदिर अब बन गए हैं, जिन पर निर्माण कार्य में सहयोग करने वाले लोगों के नाम भी अंकित हैं। 
इसी क्षेत्र में बौद्ध भग्नावेश भी मिलते हैं, जो 8 वीं शताब्दी के हैं। यहीं पर कई उत्कृष्ट कलात्मक खंबे भी नजर आते हैं, जो किसी स्तूप के अंग हैं। यही पर माता सीता और लव- कुश की एक प्रतिमा भी नजर आती है, जो 13-14 वीं शताब्दी की बताई जाती है। पाषाण निर्मित ये मूर्तियां कलात्मक तो नहीं कही जा सकती, लेकिन इससे यह बात स्पष्ट होती है कि प्राचीन काल में भी इस जगह को वाल्मिकी के आश्रम के रूप में मान्यता मिली हुई थी। 
इसका तुरतुरिया नाम पड़ने का कारण यह है कि चट्टानों के बीच से जब यह निर्धरिणी का उद्गम एक लंबी संकरी गुफा से होता है। जहां से वह बड़ी दूर तक भूमिगत होकर बही है। इस झरने का नाम ही तुरतुरिया हैं, जिसे सुरसुरी गंगा के नाम से भी जाना जाता है। घने जंगलों से घिरा है यह क्षेत्र। इस गुफा से उसका जल र्इंटों से निर्मित एक कुंड में एकत्र होता है। कुंड में उतरने के लिए सीढ़ियां बनी हुई हैं। पहाड़ों के समीप एक छोटा सा जल कुंड बना हुआ है, जिसमें पानी पहाड़ों से आकर गिरता है। बारहों महीने इसकी जलधारा प्रवाहित होती रहती है। गर्मियों में भी ठंडे शीतल जल की धारा धाराप्रवाह प्रवाहित होती रहती है। यहां पर नियुक्त महंत रामकिशोर दास के अनुसार वे पिछले 35 बरसों से इस क्षेत्र में निवास कर रहे हैं। इतने बरसों में उन्होंने कभी इस धारा को सूखते नहीं देखा है। कुंड के निकट दो शूरवीर की मूर्तियां हैं, जिनमें से एक तलवार उठाए हुए है जो उस सिंह को मारने के लिए उद्घत है जो उसकी दाहिनी भुजा को फाड़ रहा है। दूसरी मूर्ति एक जानवर का उसकी पिछली टांगों पर खड़ा होकर उसका गला मरोड़ रहा है। यहां पत्थर के कई स्तंभ यत्र-तत्र बिखरे हुए हैं, जिन पर उत्कृष्ट खुदाई का काम किया गया है।
स्त्री और बौद्घ विहार-
यह स्थान कुंड से कुछ दूरी पर नाले के दूसरे किनारे पर पहाड़ पर स्थित ुषियों के कुटियों में जाने के लिए बनाए गए पहाड़ी सीढ़ियों के समीप है। जहां पर अब मात्र जैन एवं बौद्घ भिक्षुणियों की मूर्ति है जो कि उपदेश देने की मुद्रा में दिखाए गए हैं। साथ ही उनकी शिक्षाएं भी यहीं उत्कीर्ण हैं, जो आठवी-नवीं शताब्दी की हंै। इस स्थान की विशेषता है कि यहां पुजारिनें स्त्री ही नियुक्त की जाती थीं, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि यह बौद्घ भिक्षुणियों का विहार था। भारत में केवल बौद्घ भिक्षुणियों के लिए विहार का निर्माण किया गया था या नहीं यह शोध का विषय है। इन अवशेषों से इस बात का स्पष्ट पता चलता है कि इस क्षेत्र पर 8-9 वीं शताब्दी में बौद्ध धर्म का प्रभाव था और यह प्रमुख बौद्ध स्तूप और स्थल रहा होगा। इस क्षेत्र की खुदाई और शोध से कई बातें और सामने आ सकती हैं। 
यहां के कुछ भग्न मंदिरों जिन्हें की अब जिर्णोद्घार किया जा चुका है। बौद्घ मूर्तियां खंडित अवस्था में हंै तथा समीप ही शैव वैष्णव धर्म की कुछ मूर्तियां पाई जाती हैं, जिनमें शिवलिंगों की अधिकता है। इनमें विष्णु और गणेश जी की मूर्तियां हैं। ऐसा जान पड़ता है कि अधिकांश शिवलिंगों का निर्माण बौद्घ विहार के स्तंभों को तोड़कर किया गया है।
इस क्षेत्र का महत्व छेराछेरा के मौके पर और बढ़ जाता है, जब यहां पर मेला भरता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस स्थान पर लव कुश का जन्म हुआ था इसलिए पूष माह में यहां पर तीन दिनों का मेला भरता है। छेरछेरा पर्व छत्तीसगढ़ का पारंपरिक त्यौहार है , जो पूर्णिमा यानी पुन्नी के दिन धान कटाई के बाद मनाया जाता है। इस दिन गांव-गांव में घर - घर जाकर छोटे-छोटे बच्चे गुहार (आवाज) लगाकर कहते हैं- छेरा-छेरा , कोठी के धान ल हेर हेरा। यानी धान का दान देना इस दिन शुभ माना जाता है। इस दिन लगने वाले मेले में आस-पास के हजारों लोग जुटते हैं। तब तक बालमदेही नदी का पाट काफी सिमट जाता है और गांव -गांव से आने वाले लोग नदी के रेतीले तट पर अस्थायी चूल्हे बनाकर अपने खाने-पीने का इंतजाम करते हैं। 
इस समूचे क्षेत्र में एक अच्छी बात यह देखने में आई कि पहाड़ी क्षेत्र होने के बाद भी यहां पर गांव-गांव में रौशनी है। यह कमाल सौर ऊर्जा का है। समूचे क्षेत्र में सौर ऊर्जा से बिजली प्रवाहित होती है। आस-पास के गांवों में भी छोटे-छोटे सौर प्लांट नजर आते हैं, जिनसे पूरे गांव को रौशनी मिलती है। तुरतुरिया में भी रौशनी सौर ऊर्जा से पहुंचाई जा रही है। 
इस क्षेत्र से सबसे समीप का गांव है बफरा, जहां 30 से 40 कच्चे-पक्के मकान बने हुए हैं। यह गांव तुरतुरिया से 10-12 किमी की दूरी पर स्थित है। तुरतुरिया जाने के मार्ग पर पड़ने वाले गांव काफी बिखरे हुए हैं। इसकी वजह शायद इसका पहाड़ी इलाका होना है। 
तुरतुरिया से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है मातागढ़। बालमदेही नदी के पश्चिम में स्थित इस स्थान पर देवी मां का एक प्राचीन मंदिर है। जिसकी बड़ी मान्यता है। इस मंदिर में पहुंचकर मन को शांति मिलती है।

Tuesday, 20 December 2011

मध्य प्रदेश कुशवाह युवा मोर्चा म .प्र. (अखिल भारतीय कुशवाह महासभा, दिल्ली )

मध्य प्रदेश  कुशवाह  युवा  मोर्चा  म .प्र.
 (अखिल भारतीय कुशवाह महासभा, दिल्ली )
के पदाधिकारियों को भोपाल के युवक युवती
परिचय सम्मलेन में दायित्व सोपे गए .

इस अवसर पर राष्ट्रिय अध्यक्ष-अखिल भारतीय कुशवाह महासभा दिल्ली 
 एवं गृह, जेल, एवं परिवहन राज्य मंत्री म.प्र. शासन
श्री नारायण सिंह जी कुशवाह








पूर्व अध्यक्ष पिछड़ा वर्ग  आयोग  म.प्र. शासन
श्री बाबूलाल भानपुर कुशवाह जी 
प्रांतीय अध्यक्ष म.प्र.
श्री नारायण सिंह जी कुशवाह 
ने समाज जानो के बीच मंच से
श्री नारायण सिंह जी कुशवाह विदिशा
को मध्य प्रदेश  कुशवाह  युवा  मोर्चा  म .प्र. का अध्यक्ष मनोनीत किया एवं



श्री मनोज कुमार कुशवाह इंदौर को मध्य प्रदेश  कुशवाह  युवा  मोर्चा  म .प्र.
प्रदेश उपाध्यक्ष  एवं  प्रवक्ता  मनोनीत किया. 









इसके साथ ही श्री नरेश कुशवाह ग्वालियर को प्रदेश महामंत्री बनाया गया हे.







कार्यक्रम में चर्चा करते हुवे श्री नारायण सिंह कुशवाह और मनोज कुशवाह.



















Tuesday, 15 November 2011

कुशवाह समाज के आगामी युवक युवती परिचय सम्मेलन 2011-2012

१.  
    राष्ट्रीय  युवक  युवती  परिचय  सम्मेलन , इंदौर में दिनांक
            १७-१८ दिसम्बर 2011  को आयोजित हो रहा हे.  




जिसमे सम्पूर्ण भारत से विवाह योग्य युवक युवती अपने परिवार के साथ मंच के माध्यम से अपना परिचय देंगे. कोई भी कुशवाह (कुशवाह,मौर्य, हार्डिया, सैनी, शाक्य) स्वयं का परिचय इस कार्यक्रम के माध्यम से  एवं इसके साथ प्रकाशित होने वाली परिणय स्मारिका (बुक) के माध्यम से दे सकता हे. परिणय  समारिका  में  व्यक्तिगत  परिचय देने एवं कॉमेर्सिअल विज्ञापन देने के लिए एवं उसका मूल्य पता करने बुकिंग करने के लिए तुरंत संपर्क करे. मनोज कुशवाह- 09302510720 , 09753888606  , इंदौर अंतिम तारीख ३० नवेम्बर २०११.    


२ .
मौर्य  समाज  का   परिचय  सम्मेलन , इंदौर
27-11-2011 कों मौर्य-मुराई समाज संगठन के तत्वाधान
में  पिपलिया  पाला , इंदौर  म .प्र . में  प्रातः  11 बजे  से  होगा  .
संपर्क- श्री  सदाशिव  मौर्य  9039094430 


३ .
कुशवाह समाज भोपाल , म.प्र.
द्वारा युवक युवती परिचय सम्मेलन का आयोजन 
दिनांक 11 दिसंबर 11  कों भोपाल में प्रातः 11 बजे से 
दशहरा  मैदान, विदिशा  रोड भोपाल पर होगा .
कार्यक्रम से सम्बंधित जानकारी देवे एवं लेवे ---


प्रांताध्यक्ष  - श्री नारायण सिंह जी कुशवाह 
३६/३, कांची छोला, विदिशा रोड, भोपाल 
0755 - 2739701 , 9425079257

जिलाध्यक्ष - श्री तुलसीराम जी कुशवाह
श्री हरी मैरिज गार्डन , हिनोतिया, चांदबढ़ , भोपाल 
९८२६०१९७८७


 ४.  
कुशवाह समाज परिचय सम्मेलन, होशंगाबाद म.प्र. 
कुशवाह मौर्य  क्षत्रिय समाज द्वारा होशंगाबाद  
 एस पी एम् ग्राउंड ( कल्याण  केंद्र )में 25 फ़रवरी २०१२  समाज का विशाल युवक युवती परिचय 
सम्मलेन आयोजित किया जा रहा हे जिसमे विवाह योग्य युवक युवती की जानकारी 
सामाजिक पुस्तिका के माध्यम से प्रकाशित की जाएगी, जिसमे प्रकाशन के लिए संपर्क करे.
अध्यक्ष -- श्री शालिग्राम मौर्य  09827332853 

५ . 
 कुशवाह समाज युवक युवती परिचय सम्मेलन, राजपुर, बडवानी, म.प्र.  
कुशवाह समाज युवक युवती परिचय सम्मेलन, राजपुर, बडवानी, म.प्र.में 15जन. २०१२ को आयोजित किया जायेगा सभी समाज बंधुवो से निवेदन हे की अधिक से अधिक तादाद में शामिल  हो. 
संपर्क :- अध्यक्ष- नानेश चौधरी,

.
कुशवाह समाज दिल्ली 
२५ दिसंबर 2011 समाज का विशाल युवक युवती परिचय 
सम्मलेन आयोजित किया जा रहा हे जिसमे विवाह योग्य युवक युवती की जानकारी 
सामाजिक पुस्तिका के माध्यम से प्रकाशित की जाएगी, जिसमे प्रकाशन के लिए संपर्क करे.
अध्यक्ष -- 

७.
कुशवाह समाज विदिशा म.प्र.

द्वारा  8 जनवरी २०१२  समाज का विशाल युवक युवती परिचय 
सम्मलेन बंधन गार्डन, जतरापुरा रोड विदिशा पर  आयोजित किया जा रहा हे जिसमे विवाह योग्य युवक युवती की जानकारी सामाजिक पुस्तिका के माध्यम से प्रकाशित की जाएगी, 
जिसमे प्रकाशन के लिए अंतिम तारीख 25 दिस २०११  हे.
संपर्क करे.      अध्यक्ष --श्री नारायण सिंह कुशवाह  09826322428


८ . कुशवाह  समाज  युवक  युवती   परिचय  सम्मेलन -- झाँशी   

कुशवाह समाज का विवाह योग्य युवक युवतियों का परिचय सम्मेलन दिनांक ०८-जनवरी २०१२ को सत्यम गार्डेन, जी. आई. सी. मैदान के आगे ग्वालियर रोड, झाँशी  में रखा गया हे. 
संपर्क- अध्यक्ष- श्री रमेश चन्द्र कुशवाह
इमलीपुरा, झाँशी . 
मो. 9936763137


--------------------------------------------------------------------


9.  कुशवाह समाज युवक युवती परिचय सम्मेलन सागर 
 29 जनवरी २०१२ रविवार 
रविन्द्र भवन बस स्टेंड के पास , सागर , म.प्र.
संपर्क:- श्री अर्जुन पटेल एड. 9827250877 
श्री पूरनलाल कुशवाह 9977142792 
श्री राजकुमार पटेल 9893654347
  

 एवं 

कुशवाह समाज युवक युवती परिचय सम्मेलन सागर 

१२- फर. २०१२ को रविन्द्र भवन, गर्ल्स कालेज के पास
बस स्टैंड , सागर, म.प्र.
 संपर्क--  श्री गोविन्द पटेल - 9329843500



Wednesday, 26 October 2011

दीपावली पर्व पर हार्दिक शुभकामनाये ! - 2011

दीपावली पर्व  पर  हार्दिक  शुभकामनाये ! 

कुशवाह समाज के सभी स्वजातीय बन्धुवों को मेरी और से दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएं . 
भगवान  विष्णु आप की हर इच्छा पूर्ण करे , 
माँ लक्ष्मी आप के घर को धन-धान्य  से भर दे. 


भगवान श्री रामचंद्र आप को दुनिया की हर बुराई पर विजय करने की प्रेरणा दे . 


भगवान श्री कृष्ण आप को हर तरह की परिश्तिथि में जीवन जीने की प्रेरणा दें . 


भगवान हनुमान आप को बलशाली बनाये. 




















आपका  अपना 

  मनोज  कुशवाह 

Tuesday, 23 August 2011

कुशवाह समाज लवकुश जयंती


Patrika Indore, 22-08-2011 :DigitalEdition 



भगवान लव कुश की वीरता को किया याद
कुशवाह समाज ने निकाली अपने पितृ पुरुषों की स्मृति में शोभा यात्रा
    इंदौर  रविवार दोपहर शहर की सड़कों पर मनोरम नजारा था। छोटे-छोटे बच्चे भगवान लव-कुश का रूप धरे उन्हीं की भांति घोड़ों की लगाम थाम उन्हें नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे थे। और ये सब हो रहा था भगवान लव-कुश की शोभा यात्रा में। उनके वंशज कुशवाह समाज ने लव-कुश जयंती के उपलक्ष्य में चिमनबाग मैदान से गांधी हाल तक भव्य शोभा यात्रा निकाली। यात्रा में महिलाएं कलश धारण कर चलीं तो यात्रा का आकर्षण बढ़ाया झांकियों ने। यात्रा में उद्योग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, स्वास्थ्य राज्य मंत्री महेंद्र हार्डिया, महापौर कृष्ण मुरारी मोघे, विधायक  सत्यनारायण पटेल अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान समाज के अयोध्या प्रसाद कुशवाह, रामेश्वर कुशवाह,  मनोज कुशवाह,त्रिलोक कुशवाह,  राकेशकुशवाह,  श्रीमती  राजकुमारी कुशवाह, श्रीमती अलका सैनी, श्रीमती राधा कुशवाह, श्रीमती किरण कुशवाह, श्रीमती दीक्षा कुशवाह सहित हजारों लोग मौजूद थे।



विदिशा। कुशवाह समाज द्वारा रविवार को भगवान कुश का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर शहर में भगवान लवकुश की शोभायात्रा निकाली गई। सुबह के समय सत्संग भवन में समाजजनों ने भगवान लव-कुश की पूजा की। इसके बाद शोभायात्रा प्रारंभ हुई। इसमें एक रथ पर भगवान लव-कुश के स्वरूप विराजित किए गए थे। रथ के आगे समाजजन अखाड़े का प्रदर्शन करते हुए चल रहे थे। इसमें युवाओं वबुजुर्गो ने भी शस्त्र कौशल का प्रदर्शन कर देखने वालों को अचंभित कर दिया।

शोभायात्रा अस्पताल मार्ग, माधवगंज, मुख्य मार्ग, तिलक चौक, लोहा बाजार, बजरिया होते हुए रामलीला चौराहा पहुंचकर समाप्त हुई। जहां समाजजनों ने भगवान लव-कुश की पूजा-अर्चना कर महाप्रसादी वितरित की। 



लवकुश जयंती पर निकली शोभायात्रा, बड़वानी।
 
  लवकुश जयंती पर शनिवार को कुशवाह समाज द्वारा नगर में विशाल शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में लवकुश के वेश में दो बालक शामिल थे। ट्रॉली में विराजे लवकुश के साथ हनुमानजी सभी के आकर्षण का केंद्र रहे।
कुशवाह समाज राम मंदिर से निकली शोभायात्रा नगर में प्रमुख मार्गो देवीसिंह मार्ग, गायत्री मंदिर, योगमाया मंदिर, लक्ष्मी गेस्ट हाउस रोड, झंडा चौक, रणजीत चौक, एमजी रोड, कालिका माता मंदिर होते हुए पुन: मंदिर पहुंची।

भजनों पर झूमे युवा
शोभायात्रा में सैकड़ों समाजजन शामिल हुए। शोभायात्रा में डीजे पर चल रहे भजनों पर समाज के युवा झूम रहे थे और महिलाएं गरबा करते चल रही थीं। शोभायात्रा में घोड़ों पर सवार युवक धर्मध्वजा लिए आगे चल रहे थे।

आरती व प्रसादी वितरण
समाज के नंदराम कुशवाह व नरेश रायक ने बताया कि शोभायात्रा के वापस मंदिर पहुंचने पर आरती हुई। इसके बाद महाप्रसादी का वितरण हुआ। इसके पूर्व सुबह आरती व पूजन हुआ।

पुष्पवर्षा कर किया स्वागत
शोभायात्रा का जगह-जगह स्वागत किया गया। विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों द्वारा पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया गया। समाजजनों द्वारा भी शोभायात्रा का स्वागत विभिन्न स्थानों पर किया गया।

Saturday, 20 August 2011

Anna Hazare anthem song by arun kushwaha.mp4

Anna Hazare anthem song by  arun kushwaha.mp4


 

 goto youtube then search arun kushwah




see the following links of our Anna hazare Video and audio Song...

Video Link - http://www.youtube.com/watch?v=Fkpfe0HJjvE

Downloadable MP3 - http://www.sendspace.com/file/kdrj5d























  arun kushwah                              

Monday, 1 August 2011

मेरी गतिविधिया आप के साथ





मध्य  प्रदेश   के यशस्वी  मुख्यमंत्री  श्री  शिवराज  सिंह  चौहान  जी  का  कार्यक्रम के दौरान स्वागत करते हुवे मनोज कुशवाह . 



इंदौर में कार्यक्रम के दौरान बी.जे.पी. के प्रदेश अध्यक्ष श्री प्रभात झा जी का स्वागत करते हुवे मनोज कुशवाह.



म.प्र शासन के वित्त मंत्री श्री राघव जी भाई से कार्यक्रम के दौरान मुलाकात करते हुवे मनोज कुशवाह.














इंदौर नगर से  सांसद एवं बी.जे.पी. कि राष्ट्रीय  उपाध्यक्षा श्रीमती सुमित्रा जी महाजन (ताई) के साथ कार्यक्रम के दौरान मनोज कुशवाह.





कुशवाह महासभा द्वारा आयोजित राष्ट्रीय परिचय सम्मलेन में समाज कों संबोधित करते हुवे इंदौर महानगर के महापोर श्री कृष्ण मुरारी मोघे जी के साथ मनोज कुशवाह.

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अधिवेसन के समापन अवसर पर ओमेक्स सिटी इंदौर में आई टी मिनिस्टर श्री कैलाश विजयवर्गीय जी के साथ स्मृति चित्र में मनोज कुशवाह . 



अखिल भारतीय कुशवाह महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं म.प्र. शासन के गृह राज्यमंत्री श्री नारायण सिंह जी कुशवाह के साथ कार्यक्रम के अवसर पर मनोज कुशवाह .
म.प्र. शासन के स्वास्थ्य  राज्यमंत्री श्री महेंद्र हार्डिया जी के साथ सामाजिक विषय पर चर्चा करते हुवे मनोज कुशवाह .







इंदौर क्षेत्र  क्र.१ से विधायक श्री सुदर्शनजी गुप्ता जी के चुनाव जीतने के पश्चात उनके साथ मनोज कुशवाह .
इंदौर में कुशवाह समाज के राष्ट्रीय परिचय सम्मलेन कों संबोधित करते हुवे विधायक श्री सुदर्शन गुप्ता जी साथ में मनोज कुशवाह.
इंदौर में कुशवाह समाज के राष्ट्रीय परिचय सम्मलेन में समाजजनों के साथ फोटो देते  हुवे विधायक  श्री सुदर्शन गुप्ता जी साथ में मनोज कुशवाह. 

इंदौर में कुशवाह समाज के राष्ट्रीय परिचय सम्मलेन में विधायक श्री सुदर्शन गुप्ता जी एवं बी.जे.पी. के नगर उपाध्यक्ष श्री संतोष वर्मा जी के स्वागत करते हुवे मनोज कुशवाह.
भोपाल में पूर्व सांसद श्री कैलाश सारंग जी के जन्मदिन के अवसर पर सभी के साथ मनोज कुशवाह .
कार्यक्रम के दौरान म.प्र. पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री बाबूलाल भानपुर जी का स्वागत करते हुवे मनोज कुशवाह.
सिहोर में कुशवाह समाज कि लव् कुश् जयंती के अवसर पर विधायक श्री रमेश सक्सेना जी एवं जिला अध्यक्ष श्री रामचंद्र पटेल जी के साथ मनोज कुशवाह. 
लव् कुश् जयंती के अवसर पर  स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्री महेंद्र हार्डिया जी का स्वागत करते हुवे मनोज कुशवाह.
 इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री मधु वर्मा जी का कार्यक्रम के दौरान स्वागत करते हुवे मनोज कुशवाह.
लव् कुश् जयंती चल समारोह में शामिल विधायक श्री सुदर्शन गुप्ता जी एवं विधायक श्री रमेश मंदोला जी  के साथ मनोज कुशवाह.
लव् कुश् जयंती के अवसर पर राजबाड़ा इंदौर में तैयारियों के दौरान स्वजातीय बंधुवो के साथ मनोज कुशवाह.

इंदौर में जल बचाओ आन्दोलन कि शुरुवात राजबाड़ा इंदौर से करते हुवे राज्य मंत्री श्री महेंद्र हार्डिया जी के साथ मनोज कुशवाह
  


 मध्य प्रदेश के स्वास्थय राज्य मंत्री श्री महेंद्र जी हार्डिया (बाबा) के जन्मदिवस के अवसर पर स्वजातीय बंधुवो के साथ  सुभाकम्नाये देते हुवे मनोज कुशवा